इस्लामी ज्ञान
क़ुरआन, सुन्नत और इस्लामी शिक्षाओं के अध्ययन तथा उनकी समझ को प्रोत्साहित करना।
एक ऐसी संस्था जो इस्लामी शिक्षा, आध्यात्मिक विकास, नैतिक मूल्यों और क़ुरआन व सुन्नत के मार्गदर्शन के लिए समर्पित है।
दारुल उलूम ज़कारिया ऐसा वातावरण प्रदान करने का प्रयास करता है जहाँ इस्लामी ज्ञान, अच्छे चरित्र, अनुशासन और आध्यात्मिक विकास को समान महत्व दिया जाता है।
और जानेंक़ुरआन, सुन्नत और इस्लामी शिक्षाओं के अध्ययन तथा उनकी समझ को प्रोत्साहित करना।
दैनिक जीवन में ईमानदारी, अनुशासन, सम्मान और ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देना।
विद्यार्थियों को अपने परिवार और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देना।
दारुल उलूम ज़करिया के बानी (संस्थापक) और मोहतमिम, हज़रत कारी अब्दुल जब्बार रशीदी ने अपना पूरा जीवन प्रामाणिक इस्लामी ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। कुरान, सुन्नत और इस्लामी उसूलों की गहरी समझ के साथ, उन्होंने इस मदरसे की स्थापना एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने के नेक मकसद से की थी, जो अपने ईमान और बेहतरीन अख़लाक़ (चरित्र) में मज़बूत हो। उनकी अथक मेहनत और निस्वार्थ लगन ने इस संस्थान को दीनी तालीम और रूहानी तरबियत का एक अहम मरकज़ बना दिया है। उनके कुशल नेतृत्व में, यह इदारा न केवल उच्च दर्जे की धार्मिक शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण पर भी पूरा जोर देता है, ताकि वे एक जिम्मेदार, हमदर्द और समझदार इंसान बनकर समाज और मानवता की निस्वार्थ सेवा कर सकें।
गैलरी की सामग्री जल्द ही यहाँ उपलब्ध होगी।
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आपका सच्चा सहयोग और दान दारुल उलूम ज़करिया की रोज़मर्रा की शैक्षिक गतिविधियों, छात्रों की भलाई और संस्था के समग्र विकास की रीढ़ हैं। आपका योगदान न केवल होनहार छात्रों को दीनी तालीम हासिल करने में मदद करता है, बल्कि यह आपके लिए एक बेहतरीन सदक़ा-ए-जारिया भी है।
हमारी संस्था, शैक्षिक गतिविधियों या अन्य जानकारी के लिए कृपया हमसे संपर्क करें।
सरकारी अस्पताल के पीछे, कस्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत